Fitrat Shayari

Mukaam Naseeb Fitrat Shayari

इंसान घर बदल देता है मुकाम बदल देता है
रिश्ते बदल देता है दोस्त भी बदल देता है
उसको खुशी नसीब नहीं होगी
जब तक वह अपनी फितरत नहीं बदल देता है


क्या करेंगे हम दिखावे से भरी दुनिया में
यहाँ तो आईना भी फितरत से जुदा लगता है
हमने शामिल किया जब दिल को अपने साथ कहीं
अपना चेहरा भी बड़ा अजनबी सा लगता है


करते है मोहब्बत और जताना भूल जाते है
पहले खफा होते हैं फिर मनना भूल जाते है
भूलना तो फितरत सी है ज़माने की
लगाकर आग मोहब्बत की बुझाना भूल जाते है


Aitraaz Duniya Jaan Nisar Juda Fitrat Shayari In Hindi

सबको ऐतराज है दुनिया में मेरी फितरत पे
कि क्यूँ मैं तुमपे ये जाँनिसार करता हूँ
लोग कहते हैं कि सैकड़ों परियाँ हैं यहाँ
फिर जुदा होके क्यूँ तेरा इंतजार करता हूँ


Meri Fitrat Shayari

Dushman Dost Dua Kismat Meri Fitrat Shayari

दुश्मन भी दुआ देते हैं मेरी फितरत ऐसी है
दोस्त भी दगा देते हैं मेरी किस्मत ऐसी है


Shak Bharosa फितरत शायरी

सिखा दिया तुने मुझे अपनों पर भी शक करना
मेरी फितरत में तो था गैरों पर भी भरोसा करना


नहीं चाहिए वो जो मेरी किस्मत में नही
भीख मांग कर जीना मेरी फितरत में नहीं


Shayari On Fitrat

Nakli Chehra Asli Surat Shayari On Fitrat

क्या मिलना ऐसे लोगो से जिनकी फितरत छुपी रहे
नकली चेहरा सामने आये और असली सूरत छुपी रहे


आदमी की फितरत उसकी पहचान बता देती है
कौन किस लबो लहजे का है ज़ुबान बता देती है

दिल है कदमों पे किसी के सर झुका हो या न हो
बंदगी तो अपनी फ़ितरत है ख़ुदा हो या न हो

ऐ सनम अब ज़रा अपनी फितरत बदल के देख
तुझे भी इश्क़ हो जाएगा ज़रा हमसे मिल के देख

इश्क की फितरत मलंग से रंग घोले
बाजी थी इशारों की जुंबा भी क्या बोले

फितरत शायरी


अजीब सी आदत और गज़ब की फितरत है मेरी
मोहब्बत हो या नफरत बहुत शिद्दत से करता हूँ

मुझे भी सिखा दो भूल जाने का फितरत
मैं थक गयी हूँ तुझे याद करते करते

बहते पानी की तरह है फितरत-ए-इश्क
रुकता भी नहीं थकता भी नहीं
थमता भी नहीं और मिलता भी नहीं

हमारी तो फितरत थी
दूध में शक्कर की तरह
घुल मिल जाने की

रंजिशे हैं अगर दिल में कोई तो खुलकर गिला करो
मेरी फितरत ऐसी है कि मैं फिर भी हँस कर मिलूंगी

ऐसा नही कि मेरे इन्तजार की उन्हें खबर नही
लेकिन तड़पाने की आदत तो उनकी फितरत में शुमार है

Teri Fitrat Shayari

Mohabbat Nafrat Attitude Khairaat Manjoor Teri Fitrat Shayari

तेरी मोहब्बत और मेरी फितरत में फर्क सिर्फ इतना है
कि तेरा ऐटीट्यूड नहीं जाता और मुझे झुकना नहीं आता
​​हक़ से अगर दे तो ​नफरत​ भी सर आँखों पर​
खैरात में तो तेरी मोहब्बत भी मंजूर नहीं


हमें तो अब तक तेरी फितरत ही समझ नही आई है यार
कभी तो तुम हमें टूटकर चाहने लगते हो तो कभी पहचानने

तेरी तो फितरत थी सबसे मोहब्बत करने की
हम तो बेवजह खुद को खुशनसीब समझने लगे

कुछ तो बात है तेरी फ़ितरत में ऐ सनम
वरना तुझको याद करने की खता हम बार-बार ना करते

Fitrat Shayari In Hindi


न फितरत ये रही मेरी कि आगे हाथ फैलाऊँ
है इससे अच्छा तो नहीं इसी पल मर न क्यूँ जाऊ

तुम्हारी आँखो की जुबान उर्दू ही है शायद
पढ़ने में मुझे दिक्कत हैं
और बयां ना करना तुम्हारी फितरत

मैं आईना हूँ टूटना मेरी फितरत है
इसलिए पत्थरों से मुझे कोई गिला नहीं

टूटना फितरत है इश्क की
सनम मिले तो दिल टूटता है
ना मिले तो कलम टूटती है

ज़माना चाहता है क्यों मेरी फ़ितरत बदल देना
इसे क्यों ज़िद है आख़िर फूल को पत्थर बनाने की

तुम को चाहने की वजह कुछ भी नहीं
बस इश्क़ की फितरत है बेवजह होना

पता ही न चला कि कमबख्त ज़माना कब से शुगर फ़्री हो गया ?

तुम्हारी फितरत भी उस मक्खी की तरह है
जो अपने फायदे के लिए जख्मो को भी नही छोड़ती

Fitrat Shayari Hindi


आग लगाना मेरी फितरत में नही है
मेरी सादगी से लोग जलें तो मेरा क्या

मेरी फितरत में नहीं अपने गम बयां करना
अगर तू मेरे वजूद का हिस्सा है
तो महसूस कर तकलीफ मेरी

फितरत किसी की यूँ ना आजमाया कर ए जिंदगी
क्यूंकी हर शख्स अपनी हद में लाजवाब होता है

हर कोई रखता है ख़बर ग़ैरों के गुनाहों की
अजब फितरत हैं कोई आइना नहीं रखता

Lutera Ishq Fitrat Shayari Hindi

ना तेरा है ना मेरा है
इश्क फितरत से ही लुटेरा है


इंसान की फितरत को समझते हैं ये परिंदे
कितनी भी मोहब्बत से बुलाना मगर पास नहीं आयेंगे

नजरअंदाज न किया करो तुम फितरत मेरी
पता है न कि मैं सर पर सवार भी हो जाता हूँ

मेरी फितरत में नहीं हैं किसी से नाराज होना
नाराज वो होतें हैं जिन्हें अपनेआप पर गुरूर होता है

हले रिम-झिम फिर बरसात और अचानक कड़ी धू
मोहब्बत और अगस्त की फितरत एक सी है

कैसे बदल दूं मैं फितरत ये अपनी
मुझे तुम्हें सोचते रहने की आदत सी हो गई है

इश्क की चाकरी मिलती नही खैरात में
दिल में फकीरी और फितरत सूफियाना चाहिए

हवस भरी निगाहों से देखना कुछ मर्दों की फितरत है
उसे नजरअंदाज करना औरत की खूबसूरती है

उनकी फितरत परिंदों सी थी, मेरा मिज़ाज दरख़्तों जैसा
उन्हें उड़ जाना था और मुझे कायम ही रहना था

मेरी फितरत में नहीं अपना गम बयां करना
अगर तेरे वजूद का हिस्सा हूँ तो महसूस कर तकलीफ मेरी

झरनों की फितरत कहाँ हैं जुदा
गिरते हैं यह भी इंसानो की तरह
इंसान की जांत ही बस बईमान है
एक में खूबसूरती, एक में किस्मत का बखान है

बहुत जुदा है औरों से मेरे दर्द की फितरत ग़ालिब
ज़ख्म का कोई निशाँ नहीं, तकलीफ की कोई इन्तहा नहीं

जब इंसान की फितरत बदल रही हो तो
ये जरुरी नहीं की इंसान बदल गया
हो सकता है
बाहर का मौसम बदल रहा हो

ये मेरे प्यार की जिद है कि अगर प्यार करु तो सिर्फ तुमसे ही करु
वरना तुम्हारी जो फितरत है वो नफरत के काबिल भी नही

अदब से झुक जाना हमारी फितरत में शामिल था
ऐ खुदा हम क्या झुके लोग खुदा हो गए

लहरों की तो फ़ितरत ही है मचाने की शोर
लेकिन होती है मंज़िल उसी की
जो तूफान नज़रों से देखता है

ज़मीं पर रह कर आसमान छूने की फितरत है मेरी
पर गिरा कर किसी को उपर उठने का शौक नहीं मुझे

तुम्हें चाहने की वजह कुछ भी नहीं
बस इश्क की फितरत है बे-वजह होना

ये मेरे दिल की जिद है की प्यार करुँ तो सिर्फ तुमसे करूँ
वरना तुम्हारी जो फितरत है वो नफरत के भी काबिल नहीं

बदला जो रंग उसने हैरत हुयी मुझे
मौसम को भी मात दे गयी फ़ितरत जनाब की

हमें तो कब से पता था की तू बेवफ़ा है
तुझे चाहा इसलिए कि शायद तेरी फितरत बदल जाये

दिल से खेलने की फितरत खुदा ने भी क्या खूब रखी
इश्क़ को रूह तक रखा मोहब्बत को आँखें नहीं बख्शी

जो मुँह को आ रही थी वो लिपटी है पाँवों से
बारिश के बाद मिटटी की फितरत बदल गयी